सोचूंगी मैं सुनो , पहाड़ सेक दो थोड़े , और एक अलग बर्तन में नदी का छमका लगा द…
Nextमैं ढूँढ लूँगी तुमको जान , घबरा न जाना , तुम छुपना न इतना की निकल ही न पाना , ह…
Nextएक नूर इतना चमकता है, यही दिखता है, यही खींचता है, इश्क क्या है यूँ तो खबर…
Nextजहन कि गहराइयों में जाने कितने घर कर बैठे है, कितने आस पास घूमते है कितने …
Nextउगता हुआ, ढलता हुआ कभी कभी दोपहर का पर बादलों के पीछे वाला सूरज अच्छा लगता है,…
Nextअशांत जिज्ञासा , भटकते हुए थककर शांत होने लगे , मृदु वाक कौशल , होठों के सूख…
Nextभारी भारी किन्तु प्यारे शब्दों में एक गीत लिखा , कुछ कुछ खाली सा लगा फ…
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अशांत जिज्ञासा , भटकते हुए थककर शांत होने लगे , मृदु वाक कौशल , होठों के सूख…
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