वो मनाते मनाते हारती है तो रूठ जाती है उसे पता है , मैं उसे रूठा न…
Nextसोसाईटी की एक मीटिंग खत्म होने के बाद सब अपने अपने घर जा रहे थे मेरे पड़ोसी सक्सेना…
Nextसर बोर्ड पर कुछ लिखने लगे तभी मैं पीछे से सर के उड़े हुए बालो की और बिना हाथ उठाये…
Nextएक नूर इतना चमकता है, यही दिखता है, यही खींचता है, इश्क क्या है यूँ तो खबर…
Nextकाश मेरा दिल गोल होता, कोई बात होती तो वो ठह…
Nextजहन कि गहराइयों में जाने कितने घर कर बैठे है, कितने आस पास घूमते है कितने …
Nextउगता हुआ, ढलता हुआ कभी कभी दोपहर का पर बादलों के पीछे वाला सूरज अच्छा लगता है,…
Nextतुम्हें मैं किस तरह सहारा दूँ जिससे केवल तुम्हें सुकून मिले मुझे कुछ भी न मिले। …
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अशांत जिज्ञासा , भटकते हुए थककर शांत होने लगे , मृदु वाक कौशल , होठों के सूख…
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